4. एक 3 मीटर लम्बे चालक को 10$^{–3}$ टेस्ला के समरूप चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् 100 मीटर/सेकण्ड के वेग से इस प्रकार चलाया जाता है कि वेग की दिशा, चालक की लम्बाई तथा चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा दोनों के लम्बवत् रहती है। चालक के सिरों के बीच उत्पन्न विभवान्तर होगा:
8. एक कुण्डली तथा बल्ब 12 V के दिष्ट धारा स्रोत से श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। जब एक नर्म लोहे की छड़ को कुण्डली में प्रवेशित किया जाता है तो बल्ब से निकलने वाला प्रकाश:
16. एक लघुपथित कुण्डली को एक समय-परिवर्ती (time-varying) चुम्बकीय क्षेत्र में रखा गया है। कुण्डली में प्रेरित धारा के कारण विद्युत शक्ति का क्षय होता है । यदि कुण्डली के फेरों की संख्या 4 गुनी कर दी जाए तथा कुण्डली की त्रिज्या आधी कर दी जाए तो विद्युत शक्ति का क्षय:
23. R त्रिज्या का एक वृत्ताकार लूप जिसमें i धारा बह रही है, X-Y तल में स्थित है जिसका केन्द्र मूल-बिन्दु पर है। X-Y तल से गुजरने वाला कुल चुम्बकीय फ्लक्स:
36. एक वृत्ताकार लूप की त्रिज्या R है, जिसमें I धारा प्रवाहित हो रही है, तथा जिसके केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र B है। वृत्त के अक्ष पर उसके केन्द्र से कितनी दूरी पर चुम्बकी क्षेत्र का मान B/8 होगा: